Hi! I am Swati. Welcome to my digital space. I am here to share a piece of my world through my thoughts.

It’s all how we see it!

गुरू से शिष्य ने कहा: गुरूदेव ! एक व्यक्ति ने आश्रम के लिये गाय भेंट की है।

गुरू ने कहा – अच्छा हुआ । दूध पीने को मिलेगा।

एक सप्ताह बाद शिष्य ने आकर गुरू से कहा: गुरू ! जिस व्यक्ति ने गाय दी थी, आज वह अपनी गाय वापिस ले गया ।

गुरू ने कहा – अच्छा हुआ ! गोबर उठाने की झंझट से मुक्ति मिली।

‘परिस्थिति’ बदले तो अपनी ‘मनस्थिति’ बदल लो। बस दुख सुख में बदल जायेगा.। “सुख दुख आख़िर दोनों मन के ही तो समीकरण हैं।

अंधे को मंदिर आया देखलोग हँसकर बोले -“मंदिर में दर्शन के लिए आए तो हो,पर क्या भगवान को देख पाओगे ? “अंधे ने कहा -“क्या फर्क पड़ता है,मेरा भगवान तो मुझे देख लेगा.”

द्रष्टि नहीं द्रष्टिकोण सकारात्मक होना चाहिए।



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